Time Management Total Waste Of Time

हे दोस्तों,  मुझे पूरा भरोसा है कि आपने कभी न कभी ये फील जरूर किया होगा  कि समय निकला जा रहा है और आप जो काम कर रहे है उसे एक निश्चित समय में नहीं कर पा रहे है। यानि कि जो समय आपने निश्चित किया है किसी काम को करने के लिए वो समय कम पड़  रहा है आपको लगता है कि समय को पंख लग गए है, कितनी स्पीड से निकला जा रहा है। उदहारण के तौर पर आप परीक्षा कक्ष में बैठे है और आधे से ज्यादा पेपर बचा हुआ है और अचानक आपकी नजर घडी पर जाती है और आप चौंक जाते है कि बस कुछ ही मिनट्स बाकी रह गए।

या फिर इसका एकदम उल्टा, कई बार आपको लगता है कि ये घडी की सुई को क्या हो गया है आगे क्यों नहीं बढ़ती है। आपको लगता है की जैसे समय ठहर गया है।  आगे बढ़ने का नाम ही नहीं ले रहा है।

दोस्तों एक घंटे में तो ६० मिनट्स ही होते है और ये ६० मिनट्स दोनों सीटुएशन्स में अपनी ही गति से बीत रहे होते है तो फिर क्या कारण है कि हमे अलग अलग फीलिंग्स आती है।  इसका मतलब है कि कुछ तो समय के बारे में ऐसा है जिसे हमे जानना जरूर चाहिए।

टाइम मैनेजमेंट के बारे में जो भी कुछ  सीखा है ना सब समय की बर्बादी है

दोस्तों हो सकता है कि आपने कभी ना कभी टाइम मैनेजमेंट कि क्लासेज ली होंगी।  या फिर शायद आपको फील होता होगा कि आपको भी कुछ ऐसी ट्रेनिंग लेनी चाहिए ताकि आप अपने टाइम को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सके।  आप डायरी या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे मोबाइल, कंप्यूटर यूज़ करते होंगे अपने शेडूल बनाने में, अपने कैलेंडर सेट करने में। लेकिन फिर भी आपको कहीं ना कहीं लगता है कि यार बात नहीं बन रही है और ये टाइम मैनेजमेंट के बारे में जो भी कुछ  सीखा है ना सब समय की बर्बादी है।

दोस्तों इससे पहले कि आप टाइम को मैनेज करने के चक्कर में लग जाए आपको ये जानना होगा कि ये टाइम आखिर में है  क्या ? अगर हम डिक्शनरी में लिखी परिभाषा देखे तो time is “the point or period at which things occur.”

“ घड़ी का समय” और “वास्तविक समय”

लेकिन वास्तव में सिर्फ इतना ही काफी नहीं है, दरअसल समय  दो तरह का होता है एक “ घड़ी का समय” और दूसरा “वास्तविक समय” यानि कि real time.  

ये जो घड़ी का समय होता है  इसमें, एक मिनट में 60 सेकंड, एक घंटे में 60 मिनट, दिन में 24 घंटे और साल में 365 दिन होते हैं। हर समय समान रूप से गुजरता है। जब कोई 50 वर्ष का हो जाता है, तो वे बिल्कुल 50 वर्ष के होते हैं, ना कम ना ज्यादा।

लेकिन रीयल टाइम के बारे में ऐसा नहीं है  इसमें हर समय रिलेटिव है। आप जो कर रहे हैं उसके आधार पर समय उड़ता है या घिसटता है।

आपको क्या लगता है कि आप कौन से टाइम में रहते है, घडी के टाइम में या रियल टाइम में। और यही कारण है कि  ये टाइम मैनेजमेंट गैजेट्स और सिस्टम काम नहीं करते है क्योंकि इनको घडी के समय को मैनेज करने के लिए बनाया गया है और हम रहते वास्तविक समय में है।

लेकिन दोस्तों एक अच्छी खबर ये है कि  ये जो रियल टाइम है ना ये दरअसल मानसिक है। जो सिर्फ आपके कानो के बीच में रहता है और इसे आप खुद बनाते है।  और जो चीज आप बनाते हो निश्चित तौर पर आप उसे मैनेज कर सकते हो।

दोस्तों हम अपना टाइम केवल तीन तरीको से बिताते है, पहला जब हम  विचार कर रहे होते है, दूसरा जब हम बातचीत कर रहे होते है और तीसरा जब हम कार्य कर रहे होते है।  और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप काम क्या कर रहे है, लेकिन आप समय बिताते इन्ही तीन तरीको से है।

तो अब आपको खुद ये तय करना है कि आपका समय इनमे से कौन से तरीके  में ज़्यादा व्यतीत हो रहा है। आपको ये ध्यान देना होगा कि जब आप काम कर रहे होते है तो इन तीनो मे से कौन सा पॉइंट ऐसा है जो आपको काम करने से या अपना पूरा फोकस करने से भटका रहा है।  जब आप उस पॉइंट को पकड़ लेंगे तो आप उससे पड़ रहे व्यवधान को भी हटा पाएंगे।

दोस्तों आपकी सफलता या असफलता इसी बात पर निर्भर करेगी कि आप अपना ज़्यादा समय क्या करने में बिताते है, विचार करने में, बातचीत में या फिर एक्शन लेने में।

अब समय आ गया है कि आप अपने दिमाग से ऐसे  थॉट्स हटाने का काम शुरू कर दीजिये, जो व्यवधान डालते है आपके काम में क्योंकि ये सिर्फ मानसिक है,  जो कहते है कि “हमारे पास समय नहीं है” या फिर कहते है कि “ये सही टाइम नहीं काम शुरू करने का”।

तो टाइम को मैनेज करना  बंद कीजिये, और अपनी लाइफ को मैनेज कीजिये, अपनी कार्यो  को प्रायोटाइज़ करने के बजाय अपनी, प्रायोरिटी को क्लैरिफाई कीजिये की आप करना क्या चाहते है।

टाइम मैनेजमेंट स्किल्स को blindly फॉलो करने के बजाय अपनी कंसंट्रेशन कैसे बढ़ाई जाए इस पर काम कीजिये ।

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