No excuse now

बहाने  बनाना तो आम बात है

No Excuse from Now

बचपन से आज तक हम इस आदत की इतनी ट्रेनिंग ले चुके है की अब तो हमे पता ही नहीं चलता है कि हम कितनी सफाई से इस काम को करते है। ऑफिस हो या घर, रास्ते में हो या कहीं और हम कभी न कभी अपनी इस आदत को आजमाते ही रहते है।  जी हाँ दोस्तों मैं बात कर रहा हूँ बहाने बनाने की। जिसकी ट्रेनिंग हमने बचपन से ली है।

बचपन से सीखे है ये बहाने 

याद है ना जब बचपन में स्कूल नहीं जाना होता था तो कितने बहाने बनाते थे।  और अगर किसी तरह स्कूल पहुँच भी गए तो टीचर के सामने होमवर्क क्यों नहीं हुआ इसके बहाने। और इसी उम्र से शुरू होती है बहाने बनाने की आदत, जिसको अगर सही समय पर नहीं छोड़ा जाता है तो ये हमारे जीवन का एक हिस्सा बन जाती है।

वास्तव में बहाना बनाना एक ऐसे जाल की तरह होता है जिसको यदि सही समय पर नहीं तोड़ा गया तो उम्र बढ़ने के साथ यह जाल लगातार आपको जकड़ता चला जायेगा और निश्चित है कि ये आपको  असफल बना देगा। यही बहाने बनाने की आदत हमारे जीवन में Success और Failure को डिसाइड करती है।

और आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि हमारे बनाये गए बहानों में और हमारी सफलता के बीच एक विपरीत सम्बंध होता है। यानि कि अगर आप बहाने बनाएंगे तो सफलता हाथ नहीं लगेगी।  हम जितने ज्यादा बहाने बनाते है, उतने ही सफलता से दूर चले जाते है।

हमे बहाने बनाने कि जरूरत क्यों पड़ती है

हम बहाने इसलिए बनाते है क्योंकि हमे ये तो पता है कि  असफल हो चुके है अब इज्जत तो बचानी है तो शुरू हो जाते है बहाने और डाल  देते है अपनी असफलता का ठीकरा दूसरों के कंधो पर।

हमे बहाना इसलिए बनाना पड़ता है कि अपनी कमिया छुपानी होती है।  

कई बार दूसरों की सहानुभूति मिल जाए इसलिए भी बहाने बनाते है। मैंने देखा है  बहुत से लोग घर में बीमार होने का बहाना बनाते हैं ताकि घर के लोग उनके लिए सहानुभूति रखें तथा उनकी सेवा करें। और आप बुरा ना माने मैं और आप हम सब इसमें शामिल है।

नए नए बहाने 

कुछ लोग इतने नए बहाने खोज कर लाते हैं कि लोगों को विश्वास करना ही पड़ता है। फिर भी, बहुत से बहाने ऐसे common होते हैं जिन्हे लोग बनाते रहते हैं।

  • “तबियत ठीक नहीं है” आज ऑफिस नहीं आ पाउँगा।
  • अब क्या करेंगे यार  “मेरी उम्र इस कार्य के लिए नहीं है”
  • “मेरा तो भाग्य ही ख़राब है”  जो भी करता हूँ बिगड़ जाता है।
  • यार “मेरा इस काम के लिए मन नहीं है” मैं नहीं कर पाऊंगा।
  • अबे भाई  “इसमें तो बहुत  पैसा खर्च होगा” मैं नहीं कर पाऊंगा।
  • और सबसे सॉलिड वाला तो ये है  “मेरे पास इतनी बुद्धि नहीं है यार ” कि मैं कर पाऊं।

ये बहाने बनाने की तरकीबें कुछ समय के लिए दूसरों को तो मूर्ख बना देती है लेकिन इसका जो दुष्परिणाम है वो हमारे व्यक्तित्व पर पड़ता है।  क्योंकि जब ये हमारी आदत बन जाती है तो लोग समझ जाते है कि हम बहाने बना रहे है। और आपकी नेगेटिव इमेज बनने लगती है। और हमे समझ ही नहीं आता कि लोग आपसे क्यों इतने दूर होने लगे है।

खुद का संकल्प 

और सबसे ज़्यादा दिक्कत तो तब होती है जब  ये आदत आप खुद पर भी आज़माने लगते है अब आपको अच्छे से पता है कि सुबह उठना और एक्सरसाइज करना कितना महत्वपूर्ण है हमारे खुद के स्वास्थ के लिए।  लेकिन इसके लिए भी हम बहाने बनाते है। अब मैं अगर खुद कि बात बताऊं तो मैंने अभी कुछ दिन पहले अपने नए घर में शिफ्ट किया है और उसी दिन से मैं ये बहाने बनाने में लगा हुआ हूँ कि यार यहाँ चारो तरफ कंस्ट्रक्शन चल रहा है बहुत धूल  वगैरह है, और अभी यहाँ अच्छी रोड भी नहीं है, सुबह सुबह दौड़ने की कोई अच्छी जगह ही नहीं है और आप यकीं मानिए मैंने यहाँ आकर अभी तक कोई रनिंग या एक्सरसाइज नहीं की है लेकिन मैं जब ये पोस्ट लिख रहा हूँ तो खुद से ये संकल्प भी कर रहा हूँ कि अब ये बहाने बनाना बंद कर रहा हूँ।  और सुबह सुबह एक्सरसाइज करने की अपनी सबसे अच्छी आदत को मैं नहीं छोड़ सकता और अब कोई बहाना नहीं चलेगा।

दोस्तों उम्मीद करता हूँ कि आप भी ये बहाने बनाने की आदत को छोड़ना चाहेंगे।  क्योकि सफलता हर इंसान अपने जीवन में चाहता है। और जैसा मैंने पहले कहा है बहाने बनाना और सफलता पाना दोनों के बीच विपरीत समबंध  है। या तो बहाने बना लो या सफलता पा लो, चुनाव आपका है।

उम्मीद करता हूँ ये पोस्ट आपको अच्छी लगी होगी, अगर आपके कोई सुझाव है तो आप कमैंट्स के माध्यम से साझा  सकते है। थैंक्स जय हिन्द।

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