kuch to log kahenge

अबे कौन है ये लोग, ये तो तब भी कुछ ना कुछ कहेंगे जब तू कुछ नहीं करेगा।

दोस्तों आपने जितने भी सक्सेस्स्फुल्ल लोगो को आज तक देखा होगा, इतिहास में या वर्तमान में, एक बात सबमे कॉमन मिलेगी कि उन्होंने लोगो की परवाह नहीं की,  उन्होंने कभी ये सोचा ही नहीं की लोग क्या कहेंगे। उन्हें विश्वास था खुद में, दिमाग में जो आईडिया चल रहा था उस पे, और दिखा गए इस दुनिया को आगे और आगे बढ़ने के रास्ते। शायद उनके पास इतना टाइम ही नहीं था कि लोग क्या कहेंगे इसको सोच कर अपना वक्त ख़राब करें।  

क्योंकि अगर वो लोगो की परवाह करते तो आज हम ना ही हवाई यात्रा कर रहे होते और ना ही आप आज ये वीडियो इतनी आसानी से देख रहे होते।

लोगो की परवाह मत करो

हमारी सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये है कि हम उन लोगो की बातों सुनकर अपने काम को रोक देते है जो लोग आपके विचार, आपके आईडिया के बारे में कुछ नहीं जानते और मजे की बात तो ये है कि उनमे से अधिकतर तो उस फील्ड से भी नहीं होते।

समस्या तो हम खुद है

ये जो लोग है ना जो कुछ ना कुछ  कहते है, अगर आप गौर से देखो तो ये कोई समस्या ही नहीं है। असली  समस्या तो हम खुद है, दरअसल हमे भी कोई ना कोई बहाना चाहिए क्योंकि खुद पर विश्वास नहीं होता, कि जो हम सोच रहे है या कर रहे है वो सक्सेसफुल होगा भी या नहीं, ये जो लैक ऑफ़  सेल्फ बिलीव है ना बस ये ही है असली जड़।

एक बहुत बड़े विचारक ने कहा है कि अगर तुम अप्रसन्न हो तो इसका सीधा और साफ़  मतलब ये है कि तुम अप्रसन्न होने की तरकीब सीख गए हो और तुम्हारी असफलता की वजह यही है। और ये जो तरकीबें तुम सीख गए हो न इनमे “लोग क्या कहेंगे” ये प्रमुख तरकीबों में से एक है।

एक बात तो आप अच्छे  से जान लीजिये कि यहाँ कोई भी मतलब कोई भी आपका सपना पूरा करने के लिए नहीं है। हर कोई अपनी तकदीर और अपनी हकीकत बनाने में लगा हुआ है।

बच्चा “लोग क्या कहेंगे” इसकी परवाह नहीं करता

आपने कभी छोटे बच्चे करीब १-३ साल के बच्चे को  गौर से देखा है और उससे कुछ सीखा है। और नहीं देखा है तो देखिये कि वो बच्चा “लोग क्या कहेंगे” इसकी परवाह नहीं करता।  और अब तो रिसर्च ने भी आंकड़े दे दिए है कि औसतन एक बच्चा दिन में लगभग 400 बार अपने आस पास के लोगो की ना सुनता है उनकी डांट सुनता है। आप क्या समझते हो कि अगर वो आपकी डांट की परवाह करेगा तो कुछ सीख पायेगा नहीं कभी भी नहीं सीख पायेगा।  और जब वो बड़ा होता जाता है तो हम उसे “लोग क्या कहेंगे” इसका अहसास कराते है और आगे आगे परिस्थतिया भी ऐसी बना देते है कि फिर वो भी “लोग क्या कहेंगे” इसके चक्कर में फंस जाता है।

दोस्तों जब आप कुछ नहीं भी करोगे तो ये लोग तब भी कुछ न कुछ कहेंगे।  तो जब लोग कुछ ना कुछ कहेंगे ही तो फिर क्यों ना अपने काम पे फोकस किया जाय और कुछ ऐसा किया जाए कि जिंदगी खराब जाती ना दिखाई पड़े।  क्योंकि जिंदगी तो एक ही मिली है और इसी में सब कुछ करना है।

मैं उम्मीद करता हूँ आप मेरे विचारो से सहमत होंगे। आज बस इतना ही, थैंक्यू जयहिंद।

Please follow and like us:
error0

You may also like...

2 Responses

  1. SAURABH says:

    Hello fit4hit.com, How R you Bro