Kab Khoon Khaulega Re Tera

कब खून खौलेगा रे तेरा

किसी भी काम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए जूनून चाहिए, हिम्मत चाहिए, टारगेट से निगाह हटनी नहीं चाहिए, जहन में ये क्लियर होना चाहिए की मैं कर क्या रहा हूँ। दोस्तों ये सब बाते तो ठीक है मगर कुछ ऐसा भी है जिसके रहते हुए  भी आप अपने लक्षय को नहीं पा सकते और कुछ ऐसी अड़चने हमारी राह में जो दीवार बनकर खड़ी रहती है हमारी सफलता और हमारे बीच में, और उनमे से एक अड़चन का नाम है कम्फर्ट जॉन। ये एक ऐसा दौर होता है किसी भी इंसान के जीवन में कभी न कभी जरूर आता है। जिसे कोई भी इंसान तोडना नहीं चाहता।  हर इंसान चाहता है कि उसकी जिंदगी में आराम बना रहे।


मोटिवेशन  कोई बाहर से सुनी सुनाई बात नहीं है

ये जो मोटिवेशन  होता है ना ये कोई बाहर से सुनी सुनाई बात नहीं होती है। ऐसा हो सकता है कि आप ग्रेट स्पीकर्स को सुने और कुछ समय तक आप फुल्ली मोटिवेटेड होकर अपना काम करें, लेकिन उधार ली हुई फीलिंग को आप कब तक रख पाएंगे कुछ समय बाद राह में आने वाली बाधाएं आपको कमजोर कर देंगी और आप को फिर से किसी थ्रस्ट की जरूरत होगी।  आपके काम तो बस आपका सेल्फमोटिवेशन ही आएगा। जो आपको निरंतर आगे की तरफ और की तरफ धकेलता रहेगा।

चैम्पियन और साधारण इंसान का फर्क

ये बात सही है कि जितने भी सक्सेसफुल लोग हुए है उन्हें कभी न कभी थ्रस्ट की जरूरत पड़ी है।  और ये साइंस का नियम भी है आपको एक स्टेट से दूसरी स्टेट में जाने के लिए फोर्स को जरूरत होती है। जैसे पानी को अगर भाप बनाना है तो 100 डिग्री तक पहुँचाना होगा इससे कम में बात नहीं बनेगी।  इसी तरह राकेट को पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकालना है तो पलायन वेग लगाना होगा। तो थ्रस्ट की जरूरत तो पड़ती है। लेकिन उसके बाद फिर उस गति को बनाये रखना बहुत जरूरी होता है और एक चैम्पियन और एक साधारण इंसान में बीएस यही फर्क होता है।  साधारण इंसान अपने आराम को त्यागना नहीं चाहता और चैंपियन खुद हो आराम करने नहीं देता। क्योंकि वो जानता है कि अगर एक बार उसे आराम करने की आदत लग गयी तो फिर जीवन में आगे बढ़ना बंद हो जायेगा।

ये हो सकता है कि अभी आपके अंदर की आग जली ना हो, और अगर ऐसा है तो उसे एक चिंगारी की जरूरत है बस, और फिर ये आग कब तक जलेगी ये इस पर निर्भर करेगा की आग कागज में लगी थी या कोयले में। अंदर कागज या कोयला था तो आग लगी और अंदर कुछ हो ही ना तो फिर चिंगारी भी काम नहीं करेगी।

खुद को तैयार करना होगा

अच्छी बात ये है कि हम इंसान है और इंसान ये सब पैदा कर सकता है वो ये तय कर सकता है कि उसे कोयला बनना है या कागज, चिंगारी तो जिंदगी में आने वाली परेशानियों से उत्पन्न हुए फ्रिक्शन से लग जाएगी।  मुद्दा तो ये है कि आपको खुद को तैयार करना है, अपने गोल सेट करने है।

अब समय आ गया है कुछ करने का अपने लिए, अपने परिवार के लिए, अपने समाज के लिए,  जिंदगी पल पल गुजरती जा रही है, एक छण भी ये आराम नहीं लेती, आप रुकते है लेकिन समय कभी नहीं रुकता। तो तू बता मेरे दोस्त  कब खून खौलेगा रे तेरा, कब तुझे लगेगा कि वक्त निकला जा रहा है, कब तुझे लगेगा कि एक ही जिंदगी मिली है और इसी में सब करना है     

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