Importance of struggle

 बूढे किसान की कहानी 

एक बूढा किसान बहुत परेशान था वो जब भी कुछ अपने खेतो में कुछ बोता था तो बहुत कम ही उसके हाथ लगता था। कभी बारिश बहुत ज़्यादा होती थी कभी बिलकुल नहीं होती थी। कभी इतनी गर्मी होती थी की रहा ना जाये और कभी हफ्तों तक सूरज के दर्शन ही नहीं होते थे। ये कहानी बहुत पुरानी है ये इतनी पुरानी है कि उस ज़माने में भगवान् से लोगो का डायरेक्ट संपर्क था।  लोग सीधे सीधे भगवान् से बात कर लेते थे।

तो वो बूढ़ा किसान भी एक दिन ईश्वर के पास गया और बोला, “देखिए, आप भगवान होंगे और आपने ही यह दुनिया भी बनाई होगी लेकिन मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि आप सब कुछ नहीं जानते: आप किसान नहीं हो और आपको खेतीबाड़ी का क-ख-ग भी नहीं पता. और मेरे पूरे जीवन के अनुभव का निचोड़ यह कहता है कि आपकी रची प्रकृति और इसके काम करने का तरीका बहुत खराब है. आपको अभी सीखने की ज़रूरत है.”

ईश्वर ने कहा अच्छा भाई, “ बताओ मुझे क्या करना चाहिए?”

किसान ने कहा, “आप नहीं कर पाओगे मुझे ही करना होगा आप एक काम करो मुझे एक साल का समय दो और सब चीजें मेरे मुताबिक होने दो, और देखो कि मैं क्या करता हूं।  मैं दुनिया से गरीबी का नामोनिशान मिटा दूंगा!”

भगवान् ने किसान को देखा और उसके गुस्से हो महसूस किया और फिर सोचा की यार अब इससे कौन झंझट ले चलो एक साल की टाइम दे देते है। मुझे भी थोड़ा रेस्ट मिल जायेगा मैं भी तब तक आउटिंग करके आता हूँ।  अब सब कुछ किसान की इच्छा के अनुसार हो रहा था. यह स्वाभाविक है कि किसान ने उन्हीं चीजों की कामना की जो उसके लिए ही उपयुक्त होतीं. उसने तूफान, तेज हवाओं और फसल को नुकसान पहुंचानेवाले हर खतरे को रोक दिया. सब उसकी इच्छा के अनुसार बहुत आरामदायक और शांत वातावरण में घटित हो रहा था और किसान बहुत खुश था. गेहूं की बालियां पहले कभी इतनी ऊंची नहीं हुईं! कहीं किसी दुर्घटना के होने का खटका नहीं था. उसने जैसा चाहा, वैसा ही हुआ. उसे जब धूप की ज़रूरत हुई तो सूरज चमका दिया; तब बारिश की ज़रूरत हुई तो बादल उतने ही बरसाए जितने फसल को भाए.

गेहूं की ऊंची बालियां देखकर किसान का मन हिलोरें ले रहा था. वह ईश्वर से जब कभी मिलता तो यही कहता, “आप देखना, इस साल इतनी पैदावार होगी कि लोग दस साल तक आराम से बैठकर खाएंगे.”

लेकिन जब फसल काटी गई तो पता चला कि बालियों के अंदर गेहूं के दाने तो थे ही नहीं! किसान हैरान-परेशान था… उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हुआ. उसने ईश्वर से पूछा, “ऐसा क्यों हुआ? क्या गलत हो गया?”

ईश्वर ने कहा, “ऐसा इसलिए हुआ कि कहीं भी कोई चुनौती नहीं थी, कोई कठिनाई नहीं थी, कहीं भी कोई उलझन, दुविधा, संकट नहीं था और सब कुछ आदर्श था. तुमने हर मुश्किल को हटा दिया और गेंहू के पौधे नपुंसक हो गए. कहीं कोई संघर्ष का होना ज़रूरी था. कुछ झंझावात की ज़रूरत थी, कुछ बिजलियां का गरजना ज़रूरी था. ये चीजें गेंहू की आत्मा को हिलोर देती हैं.” तूने तो उस संघर्ष को ही ख़त्म कर दिया जिससे झूझ्कर गेहूं का दाना बनता है, संघर्ष का होना जरूरी था।

कहानी से सीख 

यह बहुत गहरी और अनूठी कथा है. यदि तुम हमेशा खुश और अधिक खुश बने रहोगे तो खुशी अपना अर्थ धीरे-धीरे खो देगी. तुम इसकी अधिकता से ऊब जाओगे. तुम्हें खुशी इसलिए अधिक रास आती है क्योंकि जीवन में दुःख और कड़वाहट भी आती-जाती रहती है. तुम हमेशा ही मीठा-मीठा नहीं खाते रह सकते – कभी-कभी जीवन में नमकीन को भी चखना पड़ता है. यह बहुत ज़रूरी है. इसके न होने पर जीवन का पूरा स्वाद खो जाता है।


जीवन में आने वाले हर विपत्ति को स्वीकार करो

इसीलिए जीवन में आने वाले हर विपत्ति को स्वीकार करो, उसके साथ संघर्ष करो और देखना इसके बाद जो फल मिलेगा वो कितना मीठा होगा।  और ध्यान रखना अगर आपके जीवन में सब कुछ सही हो रहा है तो मामला गड़बड़ है, इसका मतलब आपने जो राह चुनी है वो सही नहीं है। क्योंकि सफलता तक पहुँचने का ऐसा कोई रास्ता ही नहीं है जो आसानी से कट जाये, बिना किसी संघर्ष के बिना किसी जिद्दोजहद के।


संघर्ष आपका दोस्त है

दोस्तों संघर्ष आपका दोस्त है, ये जो दर्द मुश्किलों से मिलता है ये दर्द आपका दोस्त है, हो सकता है की करंट मोमेंट में ये आपको अच्छा न लग रहा हो लेकिन ये आपको एक मजबूत इंसान बनाएगा।

अगर आपके पास failures नहीं है, अगर आपके पार struggles नहीं है, अगर आपके पास disappointment नहीं है तो ये निश्चित है कि आपके पास कोई स्ट्रेंथ, कोई courage, कोई compassion नहीं होगा।

सारांश 

आपको ये pain ये स्ट्रगल इसलिए मिल रहा है क्योंकि आप इसे झेलने की ताकत रखते हो वार्ना ये आपको मिला ही नहीं होता। आप जिन्दा इसलिए हो क्योंकि इस धरती पर जीने के लिए जो चुनौतिया मिलती है आप उसको सहन करने में सक्षम हो, आपका शरीर इतना सक्षम है कि वातावरण में हो रहे बदलावों को सहन कर सके। और जिस दिन आपका संघर्ष ख़त्म हो जायेगा आप इस दुनिया में नहीं रहोगे। तो संघर्ष आपका सच्चा साथी है जब तक ये है तब तक आप हो।

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